Lets Make Out ~

15 Oct 2011

गुलपोश कभी इतराए कभी 

महके तो नज़र आ जाए कहीं 

ताबीज़ बना के पहनूं उसे 

आयत की तरह मिल जाए कहीं. 



मेरा नघ्मा वोही मेरा कलमा वोही 

यार मिसाले ओंस चले 

 पाँव के कथा फिरदौस चले

कभी डाल डाल कभी पात पात 

मैं हवा पे ढूंढूं उसके निशान 



चल 
छैय्याँ छैय्याँ

छैय्याँ छैय्याँ



वो यार है जो खुशबू की तरह

जिसकी ज़ुबां उर्दू की तरह 

मेरी शाम रात मेरी कायनात 

वो यार मेरा सैय्याँ सैय्याँ 



- गुलज़ार साब 


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